बारिश के आते ही नगरों से लेकर महानगरों तक की हालात मत पूछिये…. मधेपुरा से लेकर मुंबई तक यानी नगर पंचायत से लेकर नगर निगम तक की पोल खोल देती है बारिश | यहाँ मधेपुरा के तीनों तरफ नदी है और वहाँ मुंबई के तीनों तरफ समंदर | एक ओर मधेपुरा में जल निकासी के नाम पर नाले-निर्माण में करोड़ों व्यय होने के बावजूद पानी बहता नहीं वहीं दूसरी ओर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जल निकासी के लिए 22 हज़ार करोड़ के बजटीय बाढ़ में सड़कों पर बाइक से लेकर कार व बसें भी तैरती हुई नजर आती है….. कहीं-कहीं बहती हुई दिखती हैं |
बता दें कि मानसून की पहली बारिश में ही बिगड़ गई शहरे मधेपुरा से लेकर मुंबई तक की सूरत | मधेपुरा एसडीएम श्री वृंदालाल के अनुमंडल कार्यालय की सूरते हाल तो जरा देखिए | बारिश के बाद चलना तो दूर अनुमंडल परिसर में तैरने की नौबत आ गई है…… एक वकील साब तो एसडीओ के गेट पर से ही पानी देखकर घर लौट गये……. जूते खोल हवाई चप्पल पहने और पुनः एसडीएम परिसर के घुटने भर पानी को पार कर अनुमंडल दंडाधिकारी के कोर्ट में बहस किये | चारो ओर अधिकारी से लेकर आम लोग तक जलजमाव के कारण परेशान दिखे…..!
जानिए कि अस्पताल गेट पर और अंदर जहाँ-तहाँ जलजमाव के कारण बेहद परेशानी होती है….. खासकर महिला मरीजों को | कर्पूरी चौक से लेकर थाना चौक और पूर्व सांसद डॉ.रवि के घर होकर पंचमुखी चौक तक के जल निकासी का अब तक कोई स्थाई समाधान नहीं किया जा सका है | जल निकासी पर विचार किये बिना टुकड़े-टुकड़े गैंग की तरह टुकड़े-टुकड़े नाले का निर्माण किया जाता रहा है जिससे स्थानीय लोगों का जीना दुश्वार हो गया है | कब तक सोया रहेगा यह नगर पंचायत और नगर निगम ….?