प्रत्येक माता-पिता अपनी संतान का भाग्य विधाता होता है। जहाँ माता संपूर्ण घर के दिल की धड़कन होती है वहीं पिता साहस, इज्जत और सम्मान का दर्पण। मुफ्त में तो केवल माता-पिता का प्यार ही मिलता है….. शेष हर रिश्ते के लिए इस दुनिया में कुछ-न-कुछ तो चुकाना ही पड़ता है। फिर भी कुछ को छोड़कर अधिकतर बेटा बुजुर्ग माता-पिता से बात-बात पर यही कहता है आप दोनों को तो कुछ ना कुछ तो लगा ही रहता है……।
बता दें कि जिस माँ की ममता और पिता के प्यार के चलते बेटा शोहरत हासिल करता है वही बेटा बड़ा होकर बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करता है….. जो अब वैसी संतान के लिए महंगा साबित होगा। बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी व परित्याग करने वाले बच्चों के लिए जहाँ एक ओर जेल व जुर्माना के मौजूदा प्रावधान में सरकार ढेर सारे बदलाव करने जा रही है वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा बच्चों की परिभाषा का दायरा भी विस्तृत करने का मन बनाया जा रहा है।
जानिए कि केन्द्र की मोदी सरकार ने वर्तमान कार्यकाल के पहले 100 दिनों के कामकाज में बुजुर्गों की सुरक्षा और कल्याण संबंधी कानून को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 के तहत सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने अपने बुजुर्ग माता-पिता का परित्याग करने वालों या उनके साथ दुर्व्यवहार करने वालों के लिए मौजूदा 3 महीने की सजा को बढ़ाकर 6 महीने करने का प्रस्ताव किया है।
यह भी कि बच्चों की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर इसमें दत्तक पुत्र-पुत्री या सौतेले बच्चे, दामाद-बहू, नाती-पोतों तथा कानूनी अभिभावक द्वारा पालन पोषण किए गए नाबालिक बच्चों को भी शामिल किया गया है। वर्तमान में इस परिभाषा के अंतर्गत अपनी संतान और नाती-पोते ही आते हैं। भरण पोषण की राशि पर पुनः गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा।