कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अंबिका सभागार में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धा एवं महाकवि पं.यदुनाथ झा यदुवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य व्याख्यानकर्ता डॉ.ललितेश मिश्र, पूर्व विभागाध्यक्ष , स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग (बीएनएमयू) ने कोसी अंचल के कवियों के काव्य-कुसुमों की चर्चा करते हुए कहा कि महाकवि यदुवर राष्ट्रीय चेतना के काव्य सृजन में अग्रगण्य रहे हैं। इन्हें साहित्य एवं राष्ट्रप्रेम विरासत के रूप में प्राप्त हुआ था क्योंकि पं.यदुवर जी महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक बाबू रास बिहारी लाल मंडल के अभिन्नतम मित्र थे। उनकी भाव साधना के समान ही शब्द साधना भी विलक्षण रही है।
डॉ.मिश्र ने आगे कहा कि पं.यदुनाथ झा यदुवर की यशस्वी कृति ‘मिथिला गीतांजलि’ है जो उनकी राष्ट्रीय चेतना का सशक्त संवाहक है। यदुवर जी में राष्ट्रीयता की गंगा ताजिंदगी प्रवाहित होती रही। पूर्व में विषय प्रवेश करते हुए अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने ऐसी परिचर्चा की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाकवि यदुवर कोसी अंचल के काव्य मुकुटमणि हैं। यदि कहीं स्वर्ग है तो मिथिला की धरती पर ही है क्योंकि मिथिला की नदियों का तीर नंदन-कानन से कम रमणीक नहीं है। यह यदुवर जी की राष्ट्रीय भावना की उद्ददाम अभिव्यक्ति है। उनकी कविताओं में कालचक्र का स्वभाविक रूप से मौलिक चित्रण मिलता है जिस कारण पाठक देश पर मर मिटने को तत्पर हो उठते थे। वे काव्य जगत में नवीन चेतना लेकर प्रादुर्भूत हुए थे।
सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लोगों के अंतर्मन में राष्ट्रीयता का संचार करना ही राष्ट्रीय कविता का लक्ष्य है। डॉ.मधेपुरी ने कहा कि महाकवि यदुवर सामाजिक समस्याओं को लेकर ही राष्ट्रीय कविताओं का सृजन किया है। याद रहे कि सामाजिक सद्भाव एवं पारस्परिक एकता ही तत्कालीन भारत की सामायिक समस्याएं थी।
अपने संबोधन में पूर्व कुलसचिव शचीन्द्र, प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, सुबोध कुमार सुधाकर, सुरेंद्र भारती, ध्रुव नारायण सिंह राई, डॉ.अरविंद श्रीवास्तव, डॉ.विश्वनाथ विवेका, प्रो.मणि भूषण. डॉ.विनय कुमार चौधरी आदि ने प्रायः यही कहा कि महाकवि यदुवर की राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत कविताओं में स्थायित्व का समावेश है और समाजिकता का प्रतिबिंब भी। सबों ने यही कहा कि सुंदर, कोमल एवं भावाभिव्यंजक शब्दों के चयन करने में कविवर यदुवर सिद्धहस्त रहे तथा अपने हृदय का रस व रंग भरकर सहज ही राष्ट्रीय काव्य संस्कार को अलंकृत करते रहे।
द्वितीय सत्र में कविवर द्वय परमेश्वरी प्रसाद मंडल दिवाकर एवं त्रिवेणीगंज के तारा नंदन तरुण की स्मृति में आयोजित काव्यगोष्ठी का संचालन किया प्रो.मणि भूषण वर्मा ने और इस काव्य गोष्ठी में जिन कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं का मन मोह लिया तथा तालियां बटोर ली, वे हैं- सुबोध कुमार सुधाकर, डॉ.सिद्धेश्वर, राई, सुरेंद्र भारती , उल्लास मुखर्जी , सियाराम यादव मयंक, राकेश कुमार द्विजराज, संतोष कुमार सिन्हा , डॉ.कौशल कुमार, डॉ.आलोक कुमार, विकास रंगकर्मी, डॉ.विश्वनाथ विवेका, मोहम्मद मुख्तार आलम, रघुनाथ प्रसाद यादव, श्यामल कुमार सुमित्र, डॉ.हरिनंदन यादव आदि। मौके पर बैजनाथ रजक, संजय भारती, तारा शरण, प्राण मोहन यादव, किशोर श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। अंत में सचिव डॉ.मधेपुरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।