फीफा विश्वकप फ्रांस के नाम

जो जीता वही सिकंदर। महत्वपूर्ण मौकों पर स्कोर करने की अपनी काबिलियत और शानदार किस्मत की बदौलत फ्रांस ने फीफा विश्वकप के रोमांचक फाइनल में दमदार क्रोएशिया को 4-2 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। उपविजेता रहा क्रोएशिया पहली बार फाइनल में पहुंचा था। उसने अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किए और अपने कौशल और चपलता से दर्शकों का दिल भी जीता लेकिन आखिर में जालटको डालिच की टीम को दूसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा।

फाइनल में दोनों ही टीमें 4-2-3-1 के संयोजन के साथ मैदान पर उतरी थीं। क्रोएशिया ने अच्छी शुरुआत की और पहले हाफ में न सिर्फ गेंद पर अधिक कब्जा जमाये रखा बल्कि इस बीच आक्रामक रणनीति भी अपनाए रखी। उसने दर्शकों में रोमांच भरा जबकि फ्रांस ने अपने खेल से निराश किया। पर भाग्य फ्रांस के साथ था और वह बिना किसी खास प्रयास के दो गोल करने में सफल रहा। फ्रांस को पहला मौका 18वें मिनट में मिला और वह इसी पर अंत तक बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा।

बहरहाल, फ्रांस ने 18वें मिनट में मारियो मैंडजुकिच के आत्मघाती गोल से बढ़त बनाई लेकिन इवान पेरिसिच ने 28वें मिनट में बराबरी का गोल दाग दिया। फ्रांस को हालांकि जल्द ही पेनल्टी मिली जिसे एंटोनी ग्रीजमैन ने 38वें मिनट में गोल में बदला जिससे फ्रांस हाफ टाइम तक 2-1 से आगे रहा। फ्रांस की ओर से पॉल पोग्बा ने 59वें मिनट में तीसरा गोल दागा जबकि किलियान एमबापे ने 65वें मिनट में फ्रांस की बढ़त 4-1 कर दी। जब लग रहा था कि अब क्रोएशिया के हाथ से मौका निकल चुका है तब मैंडजुकिच ने 69वें मिनट में गोल करके उसकी उम्मीद जगाई। पर नियति ने मानो फ्रांस की जीत तय कर दी थी।

गौरतलब है कि फ्रांस ने इससे पहले 1998 में विश्व कप जीता था। तब उसके कप्तान डिडियर डेसचैम्प्स थे जो अब टीम के कोच हैं। इस तरह से डेसचैम्प्स खिलाड़ी और कोच के रूप में विश्व कप जीतने वाले तीसरे व्यक्ति बन गये हैं। उनसे पहले ब्राजील के मारियो जगालो और जर्मनी फ्रैंक बेकनबऊर ने यह उपलब्धि हासिल की थी।

चलते-चलते कहना पड़ेगा कि क्रोएशिया ने बेहतर फुटबॉल खेली लेकिन फ्रांस अधिक प्रभावी और चतुराईपूर्ण खेल दिखाया, यही उसकी असली ताकत है जिसके दम पर वह 20 साल बाद फिर चैंपियन बनने में सफल रहा। पेरिस की सड़कें जश्न से सराबोर हैं आज। निश्चित रूप से चैम्पियन टीम बधाई की हकदार है। पर क्रोएशिया को विशेष साधुवाद देना भी एक सच्चे खेलप्रेमी का दायित्व बनता है।

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