डीएम द्वय गोपाल मीणा और मो.सोहैल की चाहत के अनुरूप “सच्ची शिक्षा के लिए कदाचारमुक्त परीक्षा” में निरंतर जन सहयोग प्राप्त होने पर शनै:-शनै: शिक्षा की सेहत में सुधार होते देखकर सामाजिक ऋण से उऋण होने के लिए बाबा भोलेनाथ की नगरी सिंहेश्वर की धरती पर त्रिमूर्ति रुपेश-राजेश और कुंदन द्वारा वर्ल्ड किड्स स्कूल की स्थापना 2 वर्ष पूर्व की गई थी |
यह भी बता दें कि आयोजित वार्षिकोत्सव के अवसर पर वर्ल्ड किड्स स्कूल के शैक्षणिक माहौल, व्यवस्था तथा बच्चों के पठन-पाठन में अभूतपूर्व प्रगति से संतुष्ट अभिभावकों ( विशेष रुप से माताओं ) की भीड़ इतनी हो गई कि जगह ही कम पड़ गयी | तभी तो अधिकांश पुरुषवर्ग के अभिभावकगण जहां-तहाँ खड़े रहकर भी अपने बच्चों के उमदा परफ़ोरमेंस का रसास्वादन करते देखे गये |

बता दें कि उद्घाटन समारोह का श्रीगणेश छोटे-छोटे किड्स के welcome ! सॉन्ग से किया गया | लगे हाथ उद्घाटन कार्यक्रम का आगाज समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, प्राचार्यत्रय डॉ.अशोक कुमार, डॉ.एच.एल.एस. जौहरी, डॉ.माधवानंद सहित रुपेश-राजेश…… आदि गणमान्यों द्वारा सम्मिलित रुप से दीप प्रज्वलित कर किया गया | जहां आगत अतिथियों का किड्स के नन्हे हाथों ने बुके प्रदान कर स्वागत किया वहीं विद्यालय-प्राचार्य एवं डॉ.चेतन व कुंदन द्वारा वसंत पंचमी के लाल-गुलाबी शब्दों से अतिथियों का भरपूर स्वागत किया गया | एक नन्हा बच्चा द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया |
सर्वाधिक कार्यव्यस्तता के कारण प्राचार्यत्रय डॉ.जौहरी, डॉ.माधवानंद, डॉ.अशोक कुमार एवं बी.इ.ओ. डॉ.यदुवंश यादव द्वारा अपनी-अपनी अतिसंक्षिप्त संबोधनों में बच्चों का प्रथम गुरु माता-पिता को बताते हुए यही कहा गया कि बच्चे लगभग 6 घंटे ही स्कूल में रहते हैं, शेष 18 घंटे तो अपने मां-बाप के साथ ही समय बिताते हैं | माता-पिता की जवाबदेही शिक्षक से कहीं तीन गुणा ज्यादा होती है | वर्तमान समय में बच्चों को मोबाइल एवं टी.वी. से दूर रखने की सलाह दी प्राचार्यों ने |
अंत में भौतिकी के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर एवं साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने बच्चों की सर्वाधिक संख्या में उपस्थित माताओं को संबोधित करते हुए तथा डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के विचारों को परोसते हुए यही कहा कि आप कभी भी अपने आप को असहाय न समझें | आप मातृशक्ति सर्वशक्तिमान हैं | आपको पता है दुनिया के पुरुषवर्ग की चाहत क्या होती है ? शक्ति, संपत्ति और सशक्त ज्ञान चाहिए उन्हें | इन तीनों को पाने के लिए पुरुषवर्ग को कहां जाना पड़ता है- शक्ति के लिए ‘दुर्गा’, संपत्ति के लिए ‘लक्ष्मी’ और ज्ञान के लिए ‘सरस्वती’ की आराधना करनी पड़ती है, उनसे गुहार करना पड़ता है, उसके पास जाना पड़ता है |
डॉ.मधेपुरी ने माताओं से कहा कि प्रत्येक बच्चे में देवीय शक्ति है तथा ईश्वरीय तेज छिपा है | आप उसमें पंख लगा दें ताकि बच्चा चारों ओर अच्छाइयों का प्रकाश फैलाता रहे | उन्होंने 4 वर्षीय लकवा ग्रस्त बच्ची ‘विल्मा’ एवं नेत्रहीन बच्ची ‘कंचन गावा’ की कहानी विस्तार से सुनाते हुए खासकर माताओं से यही कहा कि ना तो आप डरिये और ना बच्चों को डराईये | अपने बच्चों को बड़े-बड़े सपने देखने हेतु प्रोत्साहित कीजिए | अंत में डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित माताओं कों संदेश में ये पंक्तियां कहीं:-
भय जिसे शूल चुभ जाने का, वह फूल भला कब पाता है |
जो ज्वार देख घबराता है, वह इसी पार रह जाता है ||
सोचो मत साधन क्या होगा, पहले मन को तैयार करो |
जीने की लगन लगी है तो, पहले मरना स्वीकार करो ||
यह भी जानिये कि उद्घाटन सत्र के बाद स्कूल के सैकड़ों बच्चों द्वारा एक-से-एक बेहतरीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन देर तक किया जाता रहा | हास्य प्रस्तुति से लेकर लघुनाटक का मंचन भी दर्शकों की तालियां बटोरता रहा | प्रस्तुति की गुणवत्ता के कारण दर्शकों ने खुद को देर तक बांधे रखा | अंत में स्कूल परिवार द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई |