भारतीय जवानों ने उड़ी में शहीद हुए अपने 18 साथी जवानों की शहादत का बदला ले लिया। उड़ी हमले के 10 दिन बाद हमारे जवान अदम्य साहस का परिचय देते हुए एलओसी के पार करीब तीन किलोमीटर अंदर घुसे और चार घंटे में सात आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद कर 38 आतंकियों को मार गिराया। 45 साल में पहली बार ऐसा हुआ कि हमने पाकिस्तान को पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में घुसकर मारा। भारतीय सेना की तैयारी कितनी जबर्दस्त थी, इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के बाद हमारे सभी जवान सुरक्षित वापस लौटे। उनमें से किन्हीं को चोट तक नहीं आई।
भारतीय सेना के इस हमले की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक के बाद की गई। बैठक में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग और सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) रणबीर सिंह मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत 25 देशों के उच्चायुक्तों और राजदूतों को इन हमलों के बारे में सूचित किया। निश्चित रूप से यह उनके कूटनीतिक कौशल का परिचायक है। दूसरी ओर हमारे नैतिक बल की पराकाष्ठा यह कि इस हमले के बाद हमारे सैन्य अभियान महानिदेशक ने पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक से भी फोन पर बात की और उनसे इस अभियान का ब्योरा साझा किया।
इस हमले के बाद भारतीय सेना के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ (खास ठिकानों को लक्ष्य बनाकर गुप्त तरीके से हमला करना और यह सुनिश्चित करना कि सिर्फ लक्षित निशाने को ही नुकसान हो) की जानकारी दी गई। भारतीय सैन्य महानिदेशक ने बताया कि हमें अत्यन्त विश्वसनीय सूचना मिली थी कि आतंकी नियंत्रण रेखा पर बने आतंकी शिविरों में जम्मू-कश्मीर और अन्य महानगरों में हमले के उद्देश्य से एकत्र हुए हैं। इसी कारण बिना देर किए उन्हें उनके अंजाम तक पहुँचा दिया गया।
भारत के इस मुँहतोड़ जवाब के बाद पाकिस्तान बौखलाहट में है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान पलटवार कर सकता है। हालांकि उड़ी के बाद अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर बुरी तरह घिर चुके (गौरतलब है कि भारत के कड़े रुख के कारण इस्लामाबाद में प्रस्तावित सार्क सम्मेलन भी रद्द हो चुका है) और अन्दरूनी तौर पर अत्यन्त ‘जर्जर’ पाकिस्तान के लिए ऐसा करना बहुत आसान नहीं है, और अगर वह कोई नापाक हरकत कर भी बैठता है तो भारत इसके लिए पूरी तरह तैयार है।
सबसे अच्छी बात यह कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई पर सभी राजनीतिक दल एक हैं। नियंत्रण रेखा पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद सभी दलों ने सेना को मुबारकबाद दी और सरकार को यकीन दिलाया कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई में वे सरकार के साथ हैं। दूसरी ओर सरकार भी सभी दलों को विश्वास में लेकर चल रही है।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप