परतंत्र भारत के स्वतंत्र विचारक राजा राममोहन राय ताजिन्दगी एक साथ दो लड़ाईयाँ लड़ते रहे | पहली अंग्रेजों के खिलाफ ‘आजादी की लड़ाई’ और दूसरी बाल-विवाह, सती-प्रथा, कर्मकाण्ड, पर्दा-प्रथा आदि के खिलाफ वाली लड़ाई |
परन्तु, अभी भी समाज में कुंडली मारकर बैठे ऐसे कर्मकांडों का पूर्ण परित्याग कर डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सरीखे राजा राममोहन राय के अवशेष अवतार द्वारा अपने माता-पिता के देहावसान पर भोज के नाम पर होनेवाले खर्च को बन्द करके समाज का कोपभाजन बनना स्वीकार किया गया और 1998 से अब तक बिना किसी भेद-भाव के समाज के निर्धन लोगों के बीच टी.एन.बी.ट्रस्ट के बैनर तले अत्यंत गरीब बच्चों की पढाई में सहयोग करते रहने एवं ठंड से बचाव के लिए निर्धन नर-नारियों के बीच कपड़े बांटते रहने की व्यवस्थाएं की जाती रहीं |
मधेपुरा अबतक द्वारा इस संदर्भ में डॉ.मधेपुरी से जब चर्चा की गयी तो उन्होंने कहा कि जब पूर्व लोक अभियोजक शिवनेश्वरी प्रसाद, बिहार विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा आदि जैसे समाजसेवी इस कार्यक्रम की चतुर्दिक चर्चा करते हों- और मधेपुरा के ख्यातिप्राप्त शिव मिस्ठान भंडार के मालिक अर्जुन साह सरीखे सक्षम लोग इस कार्यक्रम का अनुसरण करते हों- तो सुखद अनुभूति का अहसास होना स्वाभाविक हो जाता है |

27 जनवरी को डॉ.मधेपुरी एवं उनकी धर्मपत्नी रेणु चौधरी द्वारा सिंहेश्वर टेम्पुल ट्रस्ट में कार्यरत निर्धन चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के बीच भीषण ठंढ में कम्बल बांटा गया | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें सर्वाधिक सुकून मिलता है क्योंकि अंधविश्वास मिटाए बिना समाज का कल्याण संभव नहीं |