पिता कुली और माँ मजदूर… दोनों के दोनों अनपढ़… और बेटा देश की प्रतिष्ठित आईआईटी की परीक्षा में सफलता का परचम फहरा दे तो क्या कहेंगे आप..! जब लगन सच्ची हो तो आपको सफलता के पीछे नहीं चलना पड़ता… सफलता आपको ढूंढ़ कर आपके घर का दरवाजा खटखटा देती है। “मधेपुरा अबतक” अपार हर्ष के साथ आपको बताना चाहता है कि वो दरवाजा मधेपुरा के पुरैनी प्रखंड में रहनेवाले प्रमोद मेहता और मीरा देवी का है और गौरव से सर ऊँचा कर देनेवाली सफलता ने दस्तक दी है उनके बेटे सुजीत के लिए।
पैसे के घोर अभाव के बीच और मूलभूत सुविधाओं तक से वंचित रहने वाले परिवार के बेटे सुजीत ने आईआईटी की परीक्षा में देशभर में ओबीसी कैटेगरी में 1329वां रैंक लाकर ना केवल अपने माता-पिता और घर-परिवार बल्कि पूरे मधेपुरा को ऐसी खुशी दी है जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। सुजीत के सपनों को पंख देने में गणितज्ञ आनंद के सुपर 30 का योगदान अविस्मरणीय है। सुजीत जैसी प्रतिभाओं को मुकाम तक पहुँचाने के कारण ही आज सुपर 30 की विश्वस्तरीय प्रतिष्ठा है।
बताते चलें कि सुजीत के पिता प्रमोद मेहता पुरैनी बाजार में ही कुली का काम करते हैं और माँ मीरा देवी गाँव के खेतों में मजदूरी करती है। दो भाई और दो बहनों में एक भाई और एक बहन से छोटा है सुजीत। बड़ा भाई अजीत कलकत्ता से बीटेक करने के बाद टीसीएस में इंजीनियर है। दो बहनों में बड़ी अंजली इन्टर कर चुकी है और छोटी ने इस बार मैट्रिक की परीक्षा दी है।
सुजीत ने पुरैनी प्रखंड के ही श्री वासुदेव उच्च विद्यालय से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक करने के बाद सुपर 30की तैयारी शुरू कर दी थी। सुपर 30 में चयनित होने के बाद उसने अपने दूसरे प्रयास में 1329वां रैंक हासिल किया और अब उसकी इच्छा है आईआईटी, खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने की।