विगत वर्षों में प्रत्येक 14 सितंबर को हिन्दी दिवस विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के साथ-साथ समाहरणालयों में समारोह पूर्वक मनाया जाता रहा, परंतु 2020 का हिन्दी दिवस समारोह कोरोना के कहर के कारण फीका रहा। 70 वर्ष पुराने कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने कोरोना के कारण इस बार निज निवास ‘वृंदावन’ में ही ऑनलाइन हिन्दी दिवस समारोह मनाया।
बता दें कि डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने संक्षेप में हिन्दी एवं हिन्दी दिवस के संबंध में विभिन्न प्रकार की जानकारियां देते हुए कहा-।
भारत को समेट कर रखने में भारतीय रेल, भारतीय खेल और सरदार पटेल का विशेष योगदान है, परंतु इससे भी अधिक योगदान है हिन्दी की, जिसमें भारत की एकता और अखंडता को बरकरार रखने की शक्ति है। यदि हिन्दी नहीं होती तो भारत एक नहीं होता…। अब हिन्दी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा का गौरव पाने में अधिक देर नहीं लगेगी बशर्ते कि हम भारतीय को अंग्रेजी के प्रति बढ़ रहे मोह-भ्रम को भंग करना होगा। मोह-भ्रम को भंग करना इसलिए जरूरी है कि चीन, जापान और जर्मनी आदि जैसे उन्नत देशों को अपनी-अपनी राष्ट्रभाषा है। वे अंग्रेजी के मोह-भ्रम में कभी नहीं पड़े। डॉ.लोहिया जर्मन भाषा सीखने के बाद ही जर्मनी में पीएच.डी. की डिग्री ली थी।
आगे डॉ.मधेपुरी ने समाजवादी चिंतक व मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल द्वारा हिन्दी के संबंध में भारतीय संसद में व्यक्त किए गए विचार को संदेश स्वरूप उद्धृत करते हुए कहा-
अध्यक्ष महोदय ! मैं हिन्दी के लिए पागल नहीं हूं, परंतु भारत में अंग्रेजी को बनाए रखने की कोशिश भारतीय जनक्रांति के साथ विश्वासघात है।
चलते-चलते यह भी जानिए कि हिन्दी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। दुनिया भर में 65 करोड़ लोगों की मातृ भाषा है हिन्दी। दुनिया में हर पांच में से एक आदमी हिन्दी में इंटरनेट का उपयोग करता है। विश्व में हिन्दी ही वैसी समृद्ध भाषा है जिसमें शब्दों का वही उच्चारण होता है, जो लिखा जाता है। वर्ष 1953 में पहली बार 14 सितंबर को “हिन्दी दिवस” का आयोजन हुआ था। तभी से यह सिलसिला बना हुआ है। इस दिन हिन्दी भाषा की स्थिति और विकास पर मंथन-चिंतन किया जाता है। भारत में फिलहाल 77% से भी ज्यादा लोग हिन्दी बोलते हैं